Bhauma Pradosh Vrat: कब है भौम प्रदोष व्रत? जानें शुभ मुहूर्त, व्रत कथा और आरती

Bhauma Pradosh Vrat 2020: आप लोगों की जानकारी के लिए बता दें की ये व्रत भोलेनाथ (Shiv Ji) को प्रसन्न करने के लिए किया जाता है। गौर करने वाली बात यह है की हर माह की त्रयोदशी तिथि को प्रदोष व्रत रखा जाता है। इस महीने कब है Pradosh Vrat, कथा, शुभ मुहूर्त और आरती, हम आपको इन सभी विषयों के बारे में विस्तार से जानकारी मुहैया कराएंगे।

क्या है आप इस बात से वाकीफ हैं की मंगलवार को आने वाले प्रदोष व्रत को भौम प्रदोष व्रत नाम से जाना जाता है। ऐसा कहा जाता है की भौम प्रदोष व्रत रखने से Bholenath के साथ हनुमान जी (Lord Hanuman) की भी कृपा प्राप्त होती है। ऐसी मान्यता है इस व्रत को करने से मंगल ग्रह के प्रकोप से मुक्ति मिलती है।

Bhauma Pradosh Vrat Shubh Muhurat

अब आइए आपको पूजा के शुभ मुहूर्त की जानकारी देते हैं, मुहूर्त 15 सितंबर शाम 06:26 बजे से 07:36 बजे तक का है।

Bhauma Pradosh Vrat Katha

एक वृद्ध स्त्री थी जिनका एक बेटा था, बता दें की वह शिव जी और भगवान हनुमान की भक्त थी। हनुमान जी एक दिन इस वृद्ध महिला की भक्ति की परीक्षा लेने साधु रूप में पहुंचे और वृद्धा के घर पहुंच बोले की कोई हनुमान भक्त है तो बाहर आए।

ये बोल सुनते ही वृद्धा घर से बाहर आईं और उन्होंने हनुमान जी को प्रणाम किया। हनुमान जी जो साधु रूप में वृद्धा के घर आए थे उन्होंने कहा हमें भूख लगी है कुछ खाने को दो।

वृद्धा जब भोग लेने के लिए घर के अन्दर जाने लगी तब साधु बोले कि हम तुम्हारे बेटे की पीठ पर बना भोजन ही ग्रहण करेंगे। वृद्धा को यह सुनकर बहुत हैरानी हुई लेकिन वह संत भगवान को दुखी नहीं करना चाहती थी इसलिए अपने बेटे को बुलाकर लाई और साधु ने उसकी पीठ पर आग जलाकर भोजन बनाया।

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Shiv Ji Ki Aarti

जय शिव ओंकारा ॐ जय शिव ओंकारा। ब्रह्मा, विष्णु, सदा शिव अर्द्धांगी धारा ॥ॐ॥
एकानन चतुरानन पंचानन राजे। हंसानन गरुड़ासन वृषवाहन साजे ॥ॐ॥

दो भुज चार चतुर्भुज दस भुज अति सोहे। त्रिगुण रूप निरखता त्रिभुवन जन मोहे ॥ॐ॥
अक्षमाला बनमाला रुण्डमाला धारी। चंदन मृगमद सोहै भाले शशिधारी ॥ॐ॥

श्वेताम्बर पीताम्बर बाघम्बर अंगे। सनकादिक गरुणादिक भूतादिक संगे ॥ॐ॥
कर के मध्य कमंडलु चक्र त्रिशूल धर्ता। जगकर्ता जगभर्ता जगपालनकर्ता ॥ॐ॥

ब्रह्मा विष्णु सदाशिव जानत अविवेका। प्रणवाक्षर मध्ये ये तीनों एका ॥ॐ॥
त्रिगुण शिवजीकी आरती जो कोई नर गावे। कहत शिवानन्द स्वामी मनवांछित फल पावे ॥ॐ॥

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Rahul Sharma

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