ये बॉलीवुड के मकर्स हैं साहब ना सुधरने वाले, इनको सच्चाई नहीं कमाई चाहिए..

Bollywwod blog: आज वायुसेना का 88वां स्थापना दिवस है। हम सभी को अपने देश की तीनों सेनाओं जल, थल,वायु पर गर्व है। लेकिन आज बात केवल वायु सेना की ही होना चाहिए। वायु सेना के जवानों के पराक्रम को हम सभी को सराहना चाहिए। अब बात वायुसेना की हो रही है तो हाल ही में रिलीज हुई जाह्नवी कपूर की फिल्म गुंजन सक्सेना की भी बात कर ही ली जाए। फिल्म ( Bollywwod blog)को पर्दे पर पेश किया गया, लेकिन जब फिल्म देखी तो मानों ऐसा लगा वायुसेना (Air Force) के अंदर क्या बस मर्द सत्ता ही रही थी।

खैर फिल्म रिलीज होने के बाद इसका काफी विरोध किया गया और फिल्म में सेना की गलत छवि दिखाए जाने के कारण मामला कोर्ट तक भी पहुंचा। अब बात तो मुद्दे की है वो ये है कि फिल्मों की आड़ में हम परोसना क्या चाहते हैं। हर किसी को बात है आज के वक्त में अगर महिलाओं को पीड़ित, बिचारा , बेसहारा दिखाया जाए और फिर कैसे वो सबको गलत साबित करके आगे बढ़ती हैं तो वह लोगों को खासा पसंद आता है। यही सोच गुंजन सक्सेना फिल्म के मेकर्स ने भी अपने मन में रखी। लेकिन वह ये भी भूल गए ये सोशल मीडिया पर समय है यहां हर किसी को चंद सेकेंड में सच्चाई गूगूल पर खोज कर मिल जाती है।

करण जोहर के प्रोडक्शन ‘धर्मा प्रोडक्शन’ ने अपनी नई फिल्म ‘गुंजन सक्सेना- द कारगिल गर्ल'(Gunjan Saxena – The Kargil Girl) का काफी विरोध किया गया है। फिल्म की अगर खामियां गिनाना शुरू किया गया तो शब्द मेरे तो कम से कम, कम ही पड़ जाएंगे। अगर सेना के जवान ऐसे हों तो फिर देश में हम क्या सुरक्षित बैठे होते। लेकिन कोई करण जौहर से पूछे आप ऐसी फिल्मों के लिए दिमाग कहां से लाते हैं। ये मेकर्स बड़े आराम से देश की भावनाओं सेनाओं के साथ खेलते हैं और अपनी कमाई करते हैं।

कारगिल युद्ध (Kargil war) के दौरान गुंजन सक्सेना ने युद्ध क्षेत्र में निडर होकर चीता हेलीकॉप्टर उड़ाया था। इस दौरान वह मद्रास और बटालिक की ऊंची पहाड़ियों से उठाकर वापस सुरक्षित स्थान पर लेकर आईं। अगर वायु सेना में उनके साथ इतना ही भेद भाव होता तो शायद कभी गुंजन सक्सेना वो नहीं कर पातीं जिसके लिए वह जानी जाती हैं।

ऐसा नहीं है कि गुंजन सक्सेना(Gunjan Saxena) एक ऐसी फिल्म बनीं जो बनाई तो सच्चाई को पेश करने के लिए थी, लेकिन पेश कुछ और ही किया गया। मुझे लगता है अगर अब सच्चाई नहीं दिखा सकते तो सबसे अच्छा कह दें कि हमारा इससे लेना देना नहीं कम से कम लोगों को गलत सच्चाई तो नहीं पता लगे। इस देश के लोग फिल्मों में दिखाई गई चीजों से सीखते हैं लेकिन मेकर्स चंद पैसों के खातिर भावनाओं से खेलने से ना पीछे हटे हैं और ना हटने वाले हैं।

Share this!!

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *