बिहार चुनाव 2020 : CM पद को लेकर महागठबंधन में बढ़ा विवाद , उपेंद्र सिंह कुशवाहा ने दिखाए बगावती तेवर

बिहार विधानसभा चुनाव (Bihar Assembly Election 2020) की तैयारियाँ जोरों पर हैं। ऐसे में सभी राजनीतिक पार्टियां अपने अपने उम्मीदवारों के चयन में लगी हुई हैं । महागठबंधन [Mega Alliance] के मुख्य घटक दल राष्ट्रीय लोक समता पार्टी [Rashtriy Lok Samta Party] ने आरजेडी [RJD] के मुख्यमंत्री [Chief minister] उम्मीदवार तेजस्वी यादव [Tejashvi Yadav] को मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार बनाये जाने पर असहमति दर्ज की है। RLSP ने उपेंद्र कुशवाहा [Upendra Kushwaha] को मुख्यमंत्री पद का चेहरा बनाने की पेशकश की है।

RLSP प्रवक्ता धीरज कुशवाहा [Dheeraj Kushwaha] ने कहा महागठबंधन में उपेंद्र कुशवाहा ही मुख्यमंत्री पद के लिए सर्वाधिक योग्य उम्मीदवार है वहीं दूसरी तरफ महागठबंधन की दूसरी सहयोगी पार्टी विकासशील इंसान पार्टी [VIP] ने भी अपने अध्यक्ष मुकेश सहनी [Mukesh Sahni] को उपमुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार बनाने की पेशकश की है राष्ट्रीय जनता दल भी तेजस्वी के नाम के अतिरिक्त समझौता करने के लिए तैयार नहीं है।

राष्ट्रीय समता पार्टी अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा बिहार के वैशाली [Vaishali] के एक छोटे से गाँव से आते हैं। कुशवाहा मुख्यमंत्री नितीश कुमार [Nitish Kumar] के काफी करीबी माने जाते हैं। समाजवादी विचारधारा के पक्षधर कुशवाहा विधानसभा सदस्य होने के साथ ही लोकसभा [Loksabha ] और राज्यसभा [Rajyasabha] के भी सदस्य रह चुके हैं।

उपेंद्र कुशवाहा को राजीनीति में आये लगभग 35 वर्ष हो चुके हैं और राजनीति में उनकी अच्छी समझ मानी जाती है। वर्ष 1985 में उन्होंने राजनीति में कदम रखा और तब से पीछे मुड कर नहीं देखा कुशवाहा पेशे से एक शिक्षक थे और 1985 में शिक्षण कार्य करते हुए उन्होंने राजीनीतिक पारी की शुरुआत की। कुशवाहा के पिता के पूर्व मुख्यमंत्री जननायक [Jannayak ] कर्पूरी ठाकुर [Karpoori Thakur] से अच्छे सम्बन्ध थे कर्पूरी ठाकुर का उनके घर पर भी आना जाना था इसीकारण वे कर्पूरी से काफी प्रभावित हैं।

वर्ष 1988 तक कुशवाहा युवालोकदल के राज्यमहासचिव के पद पर रहे। 1988 से लेकर 1993 तक वे पार्टी के महासचिव के पद पर आसीन रहे और इसी समय कुशवाहा को बिहार की राजनीति में पहचान मिली। वे लालू प्रसाद यादव के भी प्रशंसक रहे हैं। वे प्रधानमंत्री [Prime Minister] मोदी [Modi] के भी प्रशंसक रहे हैं पिछले लोकसभा चुनाव में एनडीए [NDA] के सहयोगी भी रहे हैं। और एनडीए के सहयोगी होने का फयदा भी उनको मिला था।

पिछले चुनाव में RLSP NDA के सहयोगी के तौर पर तीन लोकसभा सीटों पर उतरी थी और मोदी फैक्टर के चलते तीनो सीटों पर विजय भी प्राप्त की वर्ष 2018 में कुशवाहा के NDA से अलग होते ही पार्टी भी टूट गई। राष्ट्रीय समता पार्टी के दो सांसद भी पार्टी से अलग हो गए। उपेंद्र सिंह कुशवाहा राज्य से लेकर केंद्र तक अनेक राजनितिक पदों पर रहे हैं। RLSP के महगठबंधन से मुख्यमंत्री पद को लेकर हुए विवाद से ऐसा लग रहा है कि जल्द ही उपेंद्र सिंह कुशवाहा की NDA में वापसी हो सकती है।

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