केंद्र सरकार के खिलाफ किसानों का प्रदर्शन, जानिए क्या है कृषि कानून?

देशभर के किसान आज (गुरुवार) को केंद्र सरकार के कृषि कानून (Agricultural law) का विरोध कर रहे हैं। हाल ही में केंद्र की मोदी सरकार के कृषि संशोधन कानून (Agricultural amendment law)को जारी किया है। इस कानून का विरोध करते हुए किसानों ने बड़ा गंभीर कदम उठाया है। दिल्ली में किसानों का भारी प्रदर्शन जारी है। जिस कारण से दिल्ली मैट्रो के कुछ रूटों को भी बदला गया है। किसानों के प्रदर्शन को देखते हुए भारी पुलिसबल को तैनात किया गया है।

पटियाला-अंबाला हाइवे पर किसानों को रोका जा रहा है। किसानों (Farmers) को रोकने के लिए वाटर कैनन का इस्तेमाल किया जा रहा है। इसके साथ ही किसानों पर आंसू गैस के गोले छोड़े जा रहे हैं। लेकिन किसानों का प्रदर्शन और गुस्सा बढ़ता ही जा रही है। किसानों ने बैरिकेडिंग को ही नदी में फेंक दिया है।

क्या है कृषि कानून

केंद्र सरकार के द्वारा पारित किए कृषि कानून को मोदी सरकार किसानों के लिए वरदान बता रही है। लेकिन किसान इसके खिलाफ हैं, आइए कानून के कुछ मुख्य बिंदुओं पर डालें नजर-

– किसानों को जो सबसे बड़ा डर है वह है न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP- Minimum Support Price) का। सरकार ने बिल के जरिए से कृषि उपज मंडी समिति (APMC-Agricultural produce market committee) यानी मंडी से बाहर भी कृषि कारोबार का रास्ता खोल दिया हैं।

– सरकार ने कहीं भी मंडियों को खत्म करने की बात नहीं कही है, लेकिन इंपैक्ट मंडियों खत्म होने का किसानों को डर है। इसके साथ ही डर अढ़ातियों को भी सता रहा है।

-बिल से ‘वन कंट्री टू मार्केट’ वाली नौबत पैदा होती नजर रही है। अब मंडी के अंदर टैक्स देना होगा इसके साथ ही मंडी के बाहर कोई भी टैक्स नहीं लगेगा। एग्रीकल्चर ट्रेड को सराकर पेश कर रही है उसके हिसाब से कारोबारी को किसी भी प्रकार का टैक्स अब नहीं देना होगा।

-किसानों के साथ ही पंजाब और हरियाणा की सरकार को भी डर सता रहा है। सरकार को इस बात डर है कि अगर निजी खरीदार सीधे किसानों से अनाज खरीदेंगे तो उन्‍हें मंडियों में मिलने वाले टैक्‍स का नुकसान होगा।

-किसानों के अदालत जाने का हक छीन लिया गया है । बिल से किसानों के अदालत जाने का हक छीन लिया गया है। अगर किसान और कंपनी के बीच कोई विवाद होता है तो उसका फैसला एसडीएम लेगा। ऐसे में किसानों को एसडीएम और डीएम पर किसी भी तरह का भरोसा नहीं है।

-किसान अभी तक बिल को लेकर पूरी तरह से क्लियर नहीं हुए हैं, वह अभी भी भ्रम में हैं। किसानों को लगता है कि सरकार का कोई भी बयान एग्रीकल्चर एक्ट में एमएसपी की गारंटी देने की बराबरी नहीं कर सकता

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